आज बार बार यही मन में आ रहा है कितने काम हैं जिन्हें ख़ास लोग ही जानते हैं, यदि उन्हीं कामों को कोई भी करने लगे तो निश्चित तौर पर उसमें त्रुटियों तो होंगी।
दिलीप भाई का मंडल समर्थन हो !
उर्मिलेश जी का साम्यवाद हो !
और
दूसरी ओर पूँजीवादी साम्यवादी हैं ।
जिस ब्राह्मणवाद के रहते अनेक आन्दोलन पनपे लेकिन जब से समाजवाद और दलित उत्थान के नये अलंम्बरदारों ने जिस नये ब्राह्मणवाद का उदय किया हुआ है उसकी लड़ाई लड़ने के लिये तो कोई बचेगा ही नहीं।
और
आर एस एस का राष्ट्र निर्माण का एजेण्डा ग़रीब विहीन भारत का स्वत: पूरा हो जायेगा ग़रीबी बेरोज़गारी अपनी जगह राजनैतिक अपराधी अपनी जगह।
मोदी जी पूरी दुनिया में घूमकर भारत की ख़ुशहाली के रास्ते तलाश रहे हैं, मुझे चौ.चरण सिंह का वह नारा आज भी याद है "भारत की ख़ुशहाली का रास्ता गाँव से होकर गुज़रता है।" आर एस एस का नारा कैसे राष्ट्र निर्माण का है उसका जायज़ा इनके भूमि अधिग्रहण क़ानून में नज़र आता है।
सजग राष्ट्र किसानों और गाँवों के दमन से कभी नहीं बनेगा हम कटोरा ले के पुरी दुनिया के सामने भले घूम लें ।
राष्ट्र निर्माण के लिये जनोपयोगी नीतियों बनानी होंगी जबकि मौजूदा सरकार ख़ास लोगों के हित की नीतियों बना रही है।
दिलीप भाई का मंडल समर्थन हो !
उर्मिलेश जी का साम्यवाद हो !
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दूसरी ओर पूँजीवादी साम्यवादी हैं ।
जिस ब्राह्मणवाद के रहते अनेक आन्दोलन पनपे लेकिन जब से समाजवाद और दलित उत्थान के नये अलंम्बरदारों ने जिस नये ब्राह्मणवाद का उदय किया हुआ है उसकी लड़ाई लड़ने के लिये तो कोई बचेगा ही नहीं।
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आर एस एस का राष्ट्र निर्माण का एजेण्डा ग़रीब विहीन भारत का स्वत: पूरा हो जायेगा ग़रीबी बेरोज़गारी अपनी जगह राजनैतिक अपराधी अपनी जगह।
मोदी जी पूरी दुनिया में घूमकर भारत की ख़ुशहाली के रास्ते तलाश रहे हैं, मुझे चौ.चरण सिंह का वह नारा आज भी याद है "भारत की ख़ुशहाली का रास्ता गाँव से होकर गुज़रता है।" आर एस एस का नारा कैसे राष्ट्र निर्माण का है उसका जायज़ा इनके भूमि अधिग्रहण क़ानून में नज़र आता है।
सजग राष्ट्र किसानों और गाँवों के दमन से कभी नहीं बनेगा हम कटोरा ले के पुरी दुनिया के सामने भले घूम लें ।
राष्ट्र निर्माण के लिये जनोपयोगी नीतियों बनानी होंगी जबकि मौजूदा सरकार ख़ास लोगों के हित की नीतियों बना रही है।

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